keniyahost blog बचपन और जिम्मेदार नागरिक। कौन जीत सकता है आज की generation में ?

बचपन और जिम्मेदार नागरिक। कौन जीत सकता है आज की generation में ?

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नमस्कार दोस्तों,  कहने को तो मैं एक भारत का एक अच्छा नागरिक हूं ,मतलब मैं कमाता हूं , घर की जिम्मेदारियां संभालता हूं , मतलब मैं भी हूं , जो कि हर कोई  नागरिक होते हैं ।

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आप ही की तरह मैं भी कुछ बड़ा करने की सोच रहा हूं । मैं सोचता हूं कि हां लाइफ ओके सा आसान बनाया जाए इसके लिए मुझे काम दिया गया 8 घंटे का मैं 12 घंटे करूंगा और इससे तनख्वाह पर तो फर्क नहीं पड़ता पर हां आपकी जिंदगी थोड़ी सी कठिन और हो जाती है। फिर मैं सोचता हूं कि  अपने जमाने में जो यह social media apps है,  इससे ही कोई content बनाउ। Popular तो नहीं हूं , पर थोड़ी बहुत आमदनी आ जाए। इन apps पर घंटा बिताया और उसी के बदोलत मुझे हजार  ,2000 views भी आ रहे हैं । मेहनत तो मैं ही कर रहा था पर कमाई editing appsऔर social media apps की हो रही थी ।  फिर मैंने सोचा कि लोग जो कहते हैं , कि अगर आप कोई काम करना चाहते हैं तो उसे सही समय पर स्टार्ट करें अगर आप 12th में मेरिट लाना चाहते हैं तो 10th में ही पढ़ने लग जाए । इस पर मुझे shinchen का एक फोटो दिमाग में आ जाता है जिसमें वह बचपन से ही घर की जिम्मेदारियां संभालता हैं। वह फोटो तो funny थी, पर उसका मतलब नहीं।

। यही तो होता है मैं daily सुनता हूं खबरों में कि आज 16 साल का बंदा , जब 20 साल का बंदा इतनी बड़ी कंपनी का मालिक हो गया या कोई influencer  बन गया । मतलब इतनी जल्दी उन्होंने कब स्टार्ट किया होगा , कि आज जाकर उन्होंने इतनी कामयाब हासिल की है। यह थी तो एक अच्छी बात ।तो मेरे जेहन में एक सवाल आया क्या हो अगर मैं बचपन से ही किसी company की शुरुआत करता और आज तक नहीं 20-25 सालों में वह कंपनी कहां से कहां पहुंच गई होती है या यदि इन social media apps का का में बचपन से ही उपयोग करता आ रहा तो मेरी life कितनी आसान हो जाती है अभी तक और यह तो एक सच्ची अवधारणा थी । फिर बचपन का क्या होता? 

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बचपन एक खूबसूरत लम्हा होता है अपनी जिंदगी का यह वह समय होता है जब आप ना तो किसी से आकर्षित हो और ना ही आप पर कोई जिम्मेदारी होती है। अपना peak time । आप हर चीज में perfect होते हो। आप मासूम होते हो और लोग आपके भोलेपन को देखकर आपसे प्यार करते थे।  लोग आपसे प्यार करते हैं । आपको खिलौने टॉफियां मिलती है ।आपको यह परवाह नहीं होती , कि आपका भविष्य कैसा होगा या आपके पास कितना टाइम है , आप कैसे संभालोगे । Zero stress। क्या आप इसे skip करना चाहोगे , ताकि आगे जाकर आपका भविष्य थोड़ा आसान हो जाए।

मैं अब जवान हो गया हूं , मैच्योर हो गया हूं।  अब इतना काम करता हूं कि मुझे लगता है , अगर मैं बचपन में थोड़ा धीरे-धीरे start कर लेता , तो मैं अभी तक कहां पहुंच चुका होता और वह लम्हे, अब उनकी कोई अहमियत नहीं है । वह दोस्त ,  जो बचपन में थे , अब नहीं है । मेरे पास से मासूमियत और भोलापन सब जा चुका है । बस बची है , काम और जिम्मेदारियां,  जिसे मुझे ही संभालना है। 

अगर आप मेरी जगह होते तो आप क्या करते हैं , तो क्या लगता आपको उस बचपन का कोई महत्व है जिसकी सारी यादें धुंधली हो रही है। अब आप अपने दोस्तों को तरक्की करते नहीं देख सकते , उनका अच्छा नहीं सोच  सकते ।

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